Sahil writer

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मेरी जान





तेरी याद तो बहुत आती है 

जब भी आती है मेरी जान ले जाती है

एक पल भी ये साँसे थमती नही तेरे जिक्र से
मेरी तो दिल की धड़कने बढ़ जाती है

यादो के समुन्दर में डूब जाता हूँ
फिर उससे उभर पाता नही

ये दिल है मेरा कोई खिलौना नही
जो तोड़ गई तू इसको बेरहम बनकर

जाना था तो चला जाती तू अकेला ही
इसको भी क्यों साथ ले गया अपनी सौगात समझकर

ये जिस्म रह गया बस बेजान बनकर
रूह तो तू ही ले गया कब्र में साथ अपने

      sahilwriter ......


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